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Humrooh publication is a team of brilliant , passionate and enthusiastic writers. Working with them is a dream for any writer. They strike a perfect balance between professional perfectionism and personal connect. It feels like a family working with them. I have published my solo book and co-authored several books with them and each time the experience has been enriching and wonderful. I wish them all the success and would strongly recommend the passionate writers to be a part of humrooh

Ranjana Sinha

A Software engineer and Budding Writer

१. हमरूह का एक रूह हूँ (Dedication to Humrooh) कैई कहदे उन कहने वालो से। बस पल भर चमकते उजालो से। रोशनी मोम पिघलने की मुरीद है। नाशिर बहुत है मौजूद करने अशात पर एक है हमरूह जो बस फरीद है। ताकयामत है तबिंद वो एक चिंगारी। हमरूह में रूह की है हिस्सेदारी। इस खाकनशीन जिस्म का क्या करूँ। जब रूह-ए-सुखन की है बीमारी। दिखे हैं ऐसे भी सुखनवर यहाँ जो दवात में जज़्बात भरते है। दिखे है वो भी जीयाले आशिक़ जो दरिया-ए-फिशां में उतरते हैं। हमरुह के कायनात में कनात ही कनात है यहाँ जज़्बो के दिल अवैज़ अशात है। हम भी इस दरिया में भीगने आ गए। शायद इस जहां से कुछ सीखने आ गए। ज़लज़ला एक ज़र्रा है बस हमरुह के पूरे कहकशाँ में। फिर भी कोशिश रहती ईमान से अब खुशी ही बिखरे फिज़ा में। Some Meanings. फरीद = Unique. नाशिर = Publisher अशात = To publish. तबिंद = Glowing

Zalzala Kalyan

A Great Gazalkar (Gazal Samrat), Telecom engineer.

हो प्रशस्त अभिसार आकाश में, देव _किशन बन हमरूह चलें।। हमरूह का मेरे लिए अर्थ है बढ़ता हुआ अभिसार ❤️ मैं अभिशार गाँगुली को तब से जानती हूँ जब वो स्वयं का एक पब्लिकेशन हाउस खड़ा करने की कोशिश में जुटे हुए थे और आज मुझे यह कहते हुऐ गर्व महसूस हो रहा है कि सिर्फ नौ महिने में हमरूह बना भी और इसमें 51पुस्तकें प्रकाशित भी हुई। कितने ही नौजवानों को स्वयं की एंथलोजी करने का मौका मिला। एक सार्थक काम और आय अर्जन मिला। जहाँ एक गृहणी भी इंस्टा पर अपनी कविता साझा कर रही है और एक कम उम्र की बच्ची भी लेखिका बन रही है, सीख रही है गुर लिखने के, फैला रही है पंख ऊँची उड़ान को। हमरूह जहाँ भाषा अपना भेद खो देती है, जहाँ जाति- राज्य एक दूसरे में लय हो जाते है जहाँ कला का सम्मान है और जहाँ आ कर उम्र और लिंग बहुत पीछे छूट जाते है। जहाँ माँ जैसे भावुक विषय पर लिखा जाता है और लाल जैसे संवेदनशील विषय पर सबको आमन्त्रित किया जाता है। हमरूह पर एक तरफ इश्क़ की आतिशी उड़ान है। वहीं दूसरी तरफ सामाजिक मुद्दो पर खुल कर लिखा जाता है। हर विषय को लेना, उसके मर्म को छूना, फिर उसके लिए भिन्न-भिन्न लोगों की राय एंथलोजी के रूप में सबके साने लाना ये ही हमरूह का सौन्दर्य है। मैं अपने पूरे मनोयोग और पूर्ण हृदय से हमरूह और हमरूह से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति को धन्यवाद देना चाहूँगी क्योंकि सभी के सबल प्रयास ने हमरूह को जीवन्त किया है और मैं स्वयं को गौरवान्वित महसूस करती हूँ कि मैं भी हमरूह परिवार का एक हिस्सा हूँ क्योंकि मुझे हमरूह में जो मान-सम्मान, आदर मिला उसके लिए मैं हृदय से पूरे हमरूह परिवार की आभारी हूँ। ये ही है हमरूह की सबसे बड़ी और आकर्षक बात कि हमरूह में हर एक व्यक्ति की अपनी पहचान है और फिर भी सब एक समान है हमरूह एक बढ़ते वृक्ष की भाँति है जो जल्दी ही एक वट वृक्ष में रूपांतरित होता जा रहा है जिसको अभिसार ने बड़े प्यार लगन और मेहनत से सहेजा है ।

Nupur Sharma

Author of Kuch Batein Dil ki and A great literary Person

A platform is needed to take your ideas to the world.Humrooh publication house is best platform to convey my thoughts to the society.Mr. Abhishar Ganguly, founder of Humrooh publication house, is an awsome and pure hearted person.All members of Humrooh publication house are very supportive. it is my privilege to be associated with Humrooh publication house like a writer. Finally I just want to say- "Humrooh Rocks ✌"

Raksha Gupta

A physics Faculty and author of Jivan Pathik

Hello everyone, Hamrooh publication is a promising platform for both readers and writers. Founder of this publication, Abhishar, is a person of great etiquettes. This platform is going to be a boon for artists, which I realised after interviewing them. I personally recommend this platform to each artist. You will find a soul-connection with this publication, as the name depicts. I can feel insights of this anthology and heart touching poems documented in it. Thanks and regards Silisti Karuriya

Silisti Karuriya

Author

"When the going gets tough, The tough gets going..." Humrooh Publication is a solid example of the above which has proven its mettle with time. The collection of anthologies and the solo titles published, have an awesome appeal and are delight to read. The team has always extended its sincere support to their co-authors and the compilers, and it is a privilege to be working with them. The rankings on global websites have shaken the floors with its record making ranks. My best wishes to the founder and director Abhishar Ganguly and the entire team.

Radhika Bhandari

Diploma in Public Adm.

Stats

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Total Book Published

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Happy Writers

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Ongoing Projects

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Community Associated